ग्लूकोमा का समय रहते इलाज कराना चाहिए- डॉ.सुनील

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पटना। विश्व ग्लूकोमा दिवस हर साल मार्च माह में मनाया जाता है। इस बार भी 7 से 13 मार्च तक यह दिवस मनाया जाएगा। इसी कडी में बुधवार को संजीवनी आई हाॅस्पिल एवं रिसर्च इंस्टीटयूट,पटना में विश्व ग्लूकोमा दिवस मनाया गया। इस मैकें पर आंखों के प्रेशर का जांच किया गया। इसमें 55 मरीजों का आंखों के प्रेशर का जांच किया गया। प्रख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को काली मोतिया,ग्लूकोमा नाम की बीमारी के लिए जागरूक करना है। इस बीमारी में आखों में बनने वाले द्रव्य के बहाव में रुकावट होने के कारण आंखों का प्रेशर बढ़ जाता है। जिससे आंखों की नस सुख जाती है और अंधापन आ जाता है। ग्लूकोमा के कई प्रकार होते हैं, जिनमें सबसे आम वृद्धावस्था का मोतियाबिंद है, जो 48 से अधिक आयुवाले लोगों में विकसित होता है। यह रोग अनुवांशिक भी होता है साथ ही यह समस्या बच्चों में जन्मजात भी हो सकती है। कई बार आपको ग्लूकोमा के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। ऐसे में आपको नियमित जांच से ही आंखों में ग्लूकोमा के बारे में पता चल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक विश्वभर में जितने लोग अपनी आंखों की रोशनी खोते हैं उसकी सबसे बड़ी वजह ग्लूकोमा होता है। सिंह ने मरीजों को बताया कि ग्लूकोमा का समय रहते इलाज कराना चाहिए। समय रहते यदि ग्लूकोमा के लक्षणों को पहचान लिया जाय तो मरीज को नेत्रहीन होने से बचाया जा सकता है।

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